Sunday, October 29, 2023
मुक्तक
1-
आओ हम आज मानस का मंथन करें
क्या सही क्या गलत इसका चिंतन करें।
यह जरूरी नहीं सभी को सुधा ही मिले
विष को कैसे पियेंगे यह जतन भी करें।।
2-
राह जीवन की कोई सुगम ही नहीं।
कौन है जिसको कोई गम ही नहीं
सूर्य उगता है ढलता करम मानकर
उसके जीवन में दूजा धरम ही नहीं।।
- डॉ.रमा द्विवेदी
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मैं द्रौपदी नहीं हूं - परिचर्चा संपन्न
``मैं द्रौपदी नहीं हूँ ''पुस्तक परिचर्चा संपन्न -युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच =====================================================...
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1- आओ हम आज मानस का मंथन करें क्या सही क्या गलत इसका चिंतन करें। यह जरूरी नहीं सभी को सुधा ही मिले विष को कैसे पियेंगे यह जतन भी करे...
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``मैं द्रौपदी नहीं हूँ ''पुस्तक परिचर्चा संपन्न -युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच =====================================================...
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बहुत खुशहालियों में भी कभी मगरूर मत होना जीत का ताज सिर पर हो कभी मजबूर मत होना। ऊंचाई व्योम हो लेकिन ज़मीं को भूल जाना मत तुम अपनी कामयाब...