1-
नई आलोचनाओं का, नया यह दौर आया है
सच चुपचाप बैठा है ,झूठ बस लहलहाया है।
बहुत मुश्किल समझ पाना नई ये ज्ञान की बातें
किसी ने सच छुपाया है, किसी ने सच बताया है।।
2-
पुरानी नींव पर देखो , नया साँचा बनाया है
करें तारीफ सब उसकी, मुलम्में से सजाया है।
बहुत मुश्किल समझ पाना ये शब्दों की कलाकारी
है आकर्षण बहुत इसमें, सभी का मन लुभाया है ।।
- डॉ रमा द्विवेदी
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